अमेरिका चीन रिश्तों में नरमी: चीन और अमेरिका की दुश्मनी को और तेज़ कर दिया था टैरिफ ने। यहां तक कि वॉशिंगटन के टैरिफ का जवाब बीजिंग ने पलटवार शुल्क से देने की घोषणा की थी। दोनों देशों की समयसीमा खत्म होने से ठीक एक दिन पहले ट्रंप ने एक बड़ा ऐलान कर चीन को 90 दिन की राहत दे दी।

अमेरिका चीन रिश्तों में नरमी
कभी-कभी यह समझ पाना बहुत मुश्किल होता है कि ट्रंप कब क्या करेंगे। जैसे चीन को दुश्मन मानकर बड़े टैरिफ लगाए हुए अमेरिका ने इसे 90 दिनों के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी। प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा से पहले ट्रंप का यह कोई चाल तो नहीं? चीन और अमेरिका की दुश्मनी को और तेज कर दिया था टैरिफ ने। यहां तक कि वॉशिंगटन के टैरिफ का जवाब बीजिंग ने पलटा शुल्क लगाकर देने की घोषणा की थी। दोनों देशों की समयसीमा खत्म होने से ठीक एक दिन पहले ट्रंप ने एक बड़ा ऐलान करते हुए चीन को 90 दिन की राहत दे दी। नवंबर तक टैरिफ नहीं लगाए जाएंगे। तो आखिर क्यों बदला अमेरिका ने अपना रुख? क्यों चीन को दिया 3 महीने का समय? प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा से पहले क्या यह ट्रंप की कोई चाल नहीं?
चीन को चारों तरफ से घेरने के लिए ब्रिक्स देशों ने एकजुटता दिखाई है। वे आपस में व्यापार बढ़ाने पर भी विचार कर रहे हैं। चीन पर टैरिफ का दबाव डालकर शायद ट्रंप ब्रिक्स देशों की योजना को नाकाम करना चाहते हों। चालू वर्ष में अमेरिका और चीन ने एक-दूसरे पर टैरिफ़ बढ़ा दिए थे। ट्रंप ने चीन पर 145 प्रतिशत टैरिफ़ लगाने की घोषणा की थी। लेकिन पिछले मई महीने में अमेरिका ने शुल्क को घटाकर 30 प्रतिशत कर दिया था। चीन ने भी अमेरिका पर 10 प्रतिशत शुल्क कम कर दिया था। 90 दिनों के लिए हुई इस टैरिफ़ समझौते की अवधि अगस्त में समाप्त होने वाली थी। इसके बाद दोनों देशों ने फिर 90 दिनों के लिए टैरिफ़ वृद्धि के फैसले को स्थगित कर दिया।
इधर, बीजिंग में मोदी के पहुंचने से पहले अमेरिका की यह घोषणा चीन के गुस्से को कुछ हद तक ठंडा कर सकती है। चर्चा है कि टैरिफ को लेकर भारत जो कूटनीतिक रणनीति अपना रहा है, उसे विफल करने के लिए ट्रंप ने यह चाल चली हो सकती है।
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