Desi cow milk record: वह गायों के आहार, स्वास्थ्य और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देते हैं। गायों को संतुलित आहार देने के लिए वह हरी घास, सूखा चारा और पशु आहार का उपयोग करते हैं।

Desi cow milk record
यकीन नहीं होता, पर सच है। हम बात कर रहे हैं एक ऐसी गाय की जो रोज़ाना 32 लीटर दूध देती है। ज़रा सोचिए… अगर एक गाय 32 लीटर दूध देती है, तो उसका मालिक रोज़ाना कितना कमाता होगा? क्योंकि दूध की कीमत 60 रुपये प्रति लीटर है। और इस खबर के सामने आने के बाद हर जगह इसकी चर्चा होने लगी। मध्य प्रदेश के खंडवा ज़िले का एक किसान इन दिनों चर्चा में है। अपनी असाधारण सफलता के लिए वह पूरे इलाके में चर्चा का केंद्र बन गया है। उसने होल्स्टीन फ़्रीज़ियन और जर्सी मिश्रित नस्ल की गाय पाल कर रोज़ाना 32 लीटर दूध देने में कामयाबी हासिल की है। जब से पता चला है कि वह इतना दूध दे रहा है, तब से स्थानीय इलाके में उसकी खूब चर्चा हो रही है।
रिपोर्टों के अनुसार, इस सफल किसान ने पशुपालन के वैज्ञानिक तरीकों और उन्नत नस्लों के चयन पर ज़ोर दिया। पशुपालन के पारंपरिक तरीकों से हटकर, उन्होंने होलस्टीन फ़्रीज़ियन और जर्सी जैसी ज़्यादा दूध देने वाली नस्लों की गायें पालीं। चूँकि इन गायों के दूध में वसा की मात्रा ज़्यादा होती है, इसलिए किसान ने इन्हें पालने का फ़ैसला किया। ये मिश्रित नस्ल की गायें भारतीय जलवायु के अनुकूल ढल जाती हैं और इनकी दूध उत्पादन क्षमता भी ज़्यादा होती है। इसलिए मालिक को भी अच्छी-खासी दो पैसे की कमाई हो जाती है। कहते हैं कि इस किसान की सफलता का श्रेय सिर्फ़ उन्नत नस्ल के मवेशियों के चयन को ही नहीं, बल्कि उनकी कड़ी मेहनत और वैज्ञानिक प्रबंधन को भी जाता है। वे गायों के आहार की गुणवत्ता, स्वास्थ्य और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देते हैं। गायों को संतुलित आहार देने के लिए वे हरी घास, सूखा चारा और पशु आहार का इस्तेमाल करते हैं। इसके साथ ही, नियमित टीकाकरण और पशु चिकित्सक से परामर्श लेकर वे गायों को स्वस्थ रखने में भी कामयाब रहे हैं।
रोज़ाना 32 लीटर दूध का उत्पादन करके, यह किसान स्थानीय डेयरी सहकारी समिति को दूध बेचकर दो पैसे कमा रहा है। उसकी सफलता अन्य किसानों को भी गाय पालन के उन्नत तरीके अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। स्थानीय क्षेत्र के कई लोगों ने अब उसकी सलाह मानकर अपनी खेती शुरू कर दी है।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश सरकार भी राज्य में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए कई योजनाएँ चला रही है। किसानों को उन्नत नस्ल की गायों की खरीद पर सब्सिडी दी जा रही है और उन्हें तकनीकी सहायता भी दी जा रही है। कई लोगों का कहना है कि इस तरह के प्रोत्साहन उपाय और खंडवा के इस किसान जैसे सफल उदाहरण निश्चित रूप से राज्य के डेयरी उद्योग को आगे बढ़ाने में मददगार साबित होंगे।
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