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अडानी ने तोड़ी चुप्पी: ट्रंप की टैरिफ नीति पर पीएम मोदी को दिए दो सुझाव”

अडानी ने तोड़ी चुप्पी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर पहले से लागू 25% आयात शुल्क के अतिरिक्त बुधवार को और 25% टैरिफ लगा दिया है। नए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के अनुसार, भारत से अमेरिका को निर्यात होने वाली वस्तुओं पर अब कुल 50% टैरिफ लागू होगा।

अडानी ने तोड़ी चुप्पी

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7 अगस्त से यह 25% टैरिफ प्रभावी होगा और इसके 21 दिनों बाद यह 50% टैरिफ पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। ट्रंप ने यह टैरिफ इसलिए लगाया क्योंकि भारत ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा है। ट्रंप के इस कदम से भारतीय उद्योगपति नाराज़ हो गए हैं। RPG एंटरप्राइजेज के अध्यक्ष हर्ष गोएंका और महिंद्रा ग्रुप के अध्यक्ष आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया पर अपना असंतोष ज़ाहिर किया है। हर्ष गोएंका ने कहा, आप हमारी निर्यात वस्तुओं पर टैरिफ़ लगा सकते हैं, लेकिन हमारी संप्रभुता पर नहीं। आनंद महिंद्रा ने इस कदम को* ‘अनिच्छित परिणामों का कानून’ (Law of Unintended Consequences) कहा और भारत के लिए दो बड़े सुझाव भी दिए। अगर आपको इस अनुवाद को संपादकीय, रिपोर्टिंग या सोशल मीडिया के लिए तैयार फ़ॉर्मेट में चाहिए, तो मैं उसे भी बना सकता हूँ।

भारत के व्यापार जगत में ट्रंप के इस कदम को लेकर तीव्र प्रतिक्रिया देखने को मिली। हर्ष गोएंका ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा आप हमारे निर्यात पर टैरिफ लागू कर सकते हैं, लेकिन हमारी संप्रभुता पर नहीं। हम अपने संकल्प को मजबूत करेंगे, विकल्प तलाशेंगे और आत्मनिर्भर बनेंगे। भारत किसी के सामने सिर नहीं झुकाएगा। हर्ष गोएंका का यह बयान स्पष्ट रूप से संकेत देता है कि भारतीय उद्योगपति इस फैसले को केवल एक आर्थिक चुनौती नहीं, बल्कि एक राजनीतिक चुनौती के रूप में भी देख रहे हैं।

अगर आपको इस अनुवाद को समाचार रिपोर्ट, भाषण, या अन्य विशेष रूप में तैयार करना हो, तो बताइए — मैं उसमें भी मदद कर सकता हूँ। पूर्व नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने लिखा है, ट्रंप ने हमें पीढ़ी में एक बार मिलने वाला ऐसा अवसर दिया है, जिसके माध्यम से हम सुधारों की दिशा में अगला बड़ा कदम उठा सकते हैं। हमें इस संकट का पूरा लाभ उठाना चाहिए। महिंद्रा ग्रुप के अध्यक्ष आनंद महिंद्रा ने ट्रंप के टैरिफ को “अनिच्छाकृत परिणाम का नियम” (Law of Unintended Consequences) बताया है। यह ऐसा निर्णय है जो उसे लागू करने वाले पर ही उलटा प्रभाव डाल सकता है। उन्होंने इसे भारत के लिए एक बड़ा अवसर मानते हुए सरकार को दो महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उनके अनुसार, यह समय 1991 जैसा एक मोड़ हो सकता है, जब भारत ने प्रमुख आर्थिक सुधारों की शुरुआत की थी।

महिंद्रा ने कहा है कि भारत को अब छोटे सुधारों से आगे बढ़कर एक व्यापक, व्यापार के लिए सरल नीति को लागू करना चाहिए। इसके तहत एक सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम बनाया जाना चाहिए, जिससे निवेशक एक ही स्थान पर सभी अनुमोदन प्राप्त कर सकें। उन्होंने सुझाव दिया कि इस नीति को पहले उन राज्यों में लागू किया जाना चाहिए जो इसके लिए तैयार हैं।
अगर भारत निवेश, पारदर्शिता और स्थिरता दिखा सके, तो यह दुनिया के निवेशकों के लिए सबसे भरोसेमंद गंतव्य बन सकता

आनंद महिंद्रा ने यह भी कहा कि भारत में पर्यटन एक अनछुआ अवसर है, जो विदेशी मुद्रा और रोजगार दोनों का एक बड़ा स्रोत बन सकता है। उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि वीज़ा प्रक्रिया को सरल और तेज़ किया जाए, पर्यटन सुविधाओं में सुधार लाया जाए, और देश में स्वतंत्र पर्यटन कॉरिडोर बनाए जाएं। इन कॉरिडोरों में सुरक्षा, स्वच्छता और उन्नत आधारभूत ढांचे पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

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