Putin Signs Mega Deal With India: नई दिल्ली, 2.7: सितंबर में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा से पहले रूस ने भारत को एक बड़ा ऑफर दिया है। इस ऑफर में रूस भारतीय नौसेना को परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां, रिफर्बिश्ड किलो-क्लास पनडुब्बियां और लंबी दूरी की कैलिबर क्रूज मिसाइलें देने को तैयार है। इससे निश्चित रूप से भारत की समुद्री युद्ध क्षमताओं में इजाफा होगा।

Putin Signs Mega Deal With India:
रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने भारत को एक दूसरी अकुला-क्लास परमाणु ऊर्जा से चलने वाली हमलावर पनडुब्बी पट्टे पर देने और हस्तांतरित करने का प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा, वह छह पुनः प्राप्त किलो-क्लास पनडुब्बियाँ और 1,500 किलोमीटर की रेंज वाली कैलिबर क्रूज मिसाइलें भी प्रदान करेगा। इस प्रस्ताव का उद्देश्य भारतीय नौसेना की पुरानी पनडुब्बियों को बदलना और इसकी आधुनिक युद्ध क्षमताओं को बढ़ाना है।
भारत के पास इस समय 17 पारंपरिक पनडुब्बियाँ हैं, जिनमें से दो तिहाई 1980 के दशक में खरीदी गई थीं और अब उनकी सेवा अवधि समाप्त होने वाली है। इस संदर्भ में भारत को नई पनडुब्बियों की आवश्यकता है। भारत वर्तमान में प्रोजेक्ट 75I पर काम कर रहा है, जो नौसेना की क्षमताओं को और बढ़ाएगा।
अकुला श्रेणी की पनडुब्बियाँ 2019 में हस्ताक्षरित 3 बिलियन डॉलर के अंतर-सरकारी समझौते के तहत 2028 तक भारतीय नौसेना को सौंप दी जाएँगी। पनडुब्बियाँ नवीनतम 3M14K कैलिबर (SS-N-30A) क्रूज मिसाइलों से लैस होंगी, जिनकी मारक क्षमता 1,500 से 2,000 किलोमीटर होगी। यह पहले नियोजित 500-600 किलोमीटर की सीमा से एक महत्वपूर्ण सुधार है।
दूसरी ओर, पुनः प्राप्त किलो-क्लास पनडुब्बियों को नोवाटार की कलिब्र क्रूज मिसाइलों से लैस किया जाएगा, जो भारतीय नौसेना की समुद्री और भूमि पर हमला करने की क्षमताओं को बढ़ाएगा। ये पनडुब्बियां सभी छह टारपीडो ट्यूबों से मिसाइलों को लॉन्च करने में सक्षम होंगी, जो कि केवल दो ट्यूबों के माध्यम से मौजूदा भारतीय किलो बेड़े की सीमित मिसाइल लॉन्च क्षमता पर एक महत्वपूर्ण सुधार है।
पुतिन की यह यात्रा रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जुलाई 2024 में मास्को आए थे और 22वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था। अब 23वें शिखर सम्मेलन से पहले रूस ने यह प्रस्ताव रखा है, जिसमें उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जो अमेरिका नहीं दे सकता, जैसे परमाणु पनडुब्बी, लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलें और एस-500 वायु रक्षा प्रणाली।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की सामरिक प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में यह प्रस्ताव बहुत महत्वपूर्ण है। अकुला श्रेणी की पनडुब्बियां और कैलिबर मिसाइलें भारतीय नौसेना को अत्याधुनिक युद्धक क्षमता प्रदान करेंगी, जो लंबी दूरी की मारक क्षमता और समुद्री सुरक्षा में एक नया मानक स्थापित करेगी। यदि इस समझौते पर हस्ताक्षर हो जाते हैं, तो यह भारत और रूस के बीच लंबे समय से चली आ रही रक्षा साझेदारी को और मजबूत करेगा और भारतीय नौसेना को आधुनिक युग की चुनौतियों के लिए तैयार करेगा।





