भारत ने बनाई सबसे घातक मिसाइल नई दिल्ली, 16.7: भारत ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल करके दुनिया को चौंका दिया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ‘एक्सटेंडेड ट्रैजेक्टरी लॉन्ग ड्यूरेशन हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल (ET-LDHCM)’ का सफल परीक्षण किया है। यह मिसाइल ध्वनि की गति से आठ गुना तेज़ यानी MAC 8 उड़ान भर सकती है और 1,500 किलोमीटर दूर तक दुश्मन के ठिकानों को निशाना बना सकती है।

भारत ने बनाई सबसे घातक मिसाइल
प्रोजेक्ट विष्णु के तहत विकसित यह मिसाइल ब्रह्मोस, अग्नि और आकाश जैसी मौजूदा भारतीय मिसाइल प्रणालियों से कहीं अधिक उन्नत और शक्तिशाली है। यह स्क्रैमजेट इंजन तकनीक से लैस है, जो बिना किसी पारंपरिक कंप्रेसर के वायुमंडलीय ऑक्सीजन का उपयोग करती है। इसकी गति ब्रह्मोस (मैक 3) से तीन गुना अधिक है। यह 2,000 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान को सहन कर सकती है और 1,000 से 2,000 किलोग्राम वजन वाले पारंपरिक और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है।
ET-LDHCM की क्या खासियत है?
ED-LDHCM को ज़मीन, हवा और समुद्र से प्रक्षेपित किया जा सकता है। इसमें रडार से बच निकलने और अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए दिशा बदलने की क्षमता है, जो इसे एस-500 और आयरन डोम जैसी आधुनिक रक्षा प्रणालियों के लिए एक चुनौती बनाती है।
इस मिसाइल के परीक्षण के साथ ही भारत अब अमेरिका, रूस और चीन जैसे उन देशों की कतार में शामिल हो गया है जिनके पास स्वदेशी हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक है। यह भारत की सामरिक शक्ति को नई ऊँचाइयों पर ले जाता है और इसे विशेष रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के जवाब में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत ने यह परीक्षण ऐसे समय में किया है जब दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है। एक ओर इज़राइल और ईरान के बीच जारी टकराव और रूस-यूक्रेन युद्ध है, तो दूसरी ओर भारत-पाकिस्तान संबंधों में भी लगातार तनाव बना हुआ है। इस स्थिति को देखते हुए भारत ने अपनी रक्षा तैयारियों को नई ऊँचाइयाँ दी हैं। ख़ासकर तुर्की और पाकिस्तान के बीच बढ़ती सैन्य नज़दीकियों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभुत्व को देखते हुए, भारत ने ब्रह्मोस, अग्नि-5 और आकाश जैसी मिसाइलों के उन्नयन समेत नई पीढ़ी के घातक हथियारों के विकास पर विशेष ज़ोर दिया है।




